सावन सोमवार 2024 तारीख – सावन सोमवार व्रत विधि

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सावन सोमवार 2024 तारीख:- 22 जुलाई, सोमवार से सावन माह की शुरुआत होगी। पंचांग के अनुसार सावन के कृष्ण पक्ष की प्रथम तिथि 21 जुलाई रविवार को दोपहर 03:46 बजे शुरू होगी। सावन में, जिसे भगवान शिव का महीना माना जाता है, भगवान शिव के भक्त प्रत्येक सोमवार को व्रत रखते हैं।

मनादर-सिरोही(राजस्थान) की टीम24 द्वारा निर्मित।

सावन सोमवार 2024 आरंभ तिथि:- सावन महीने का पहला सोमवार 22 जुलाई 2024 से शुरू हो रहा है।

सावन सोमवार 2024 समाप्ति तिथि:- सावन महीने का अंतिम सोमवार 19 अगस्त 2024 को समाप्त होगा।

सावन सोमवार 2024 तारीख

सावन सोमवार 2024 तारीख- सावन सोमवार कब है

तारीखविशेष
पहला सावन सोमवार तिथि (2024)22 जुलाई
दूसरा सावन सोमवार तिथि (2024)29 जुलाई
तीसरा सावन सोमवार तिथि (202)5 अगस्त
चौथा सावन सोमवार तिथि (2024)12 अगस्त
अंतिम सावन सोमवार तिथि19 अगस्त

2024 सावन सोमवार व्रत विधि

सावन सोमवार व्रत को आसान और सरल तरीके से करने के लिए इन चरणों का पालन करें:

प्रातःकाल की तैयारी:

महाकाल
  1. स्नान और साफ-सफाई:
  • सुबह जल्दी उठें और नहाएं।
  • साफ कपड़े पहनें और अपने पूजा स्थान की सफाई करें।

पूजा की तैयारी:

  1. पूजा स्थल तैयार करें:
  • पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें।
  • भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर को साफ करें और पूजा स्थल पर रखें।
  1. संकल्प लें:
  • भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • मन ही मन यह कहें: “मैं भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सावन सोमवार का व्रत कर रहा/रही हूँ।”
सावन सोमवार पूजा विधि

पूजा सामग्री:

  1. आवश्यक सामग्री तैयार करें:
सावन सोमवार पूजा सामान
  • जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, बिल्वपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, चावल, फल, मिठाई, धूप, दीपक, और पंचामृत को पूजा के लिए तैयार रखें।

भगवान शिव की पूजा:

सावन सोमवार व्रत विधि
  1. पूजा करें:
  • शिवलिंग पर जल और पंचामृत चढ़ाएं।
  • बिल्वपत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल अर्पित करें।
  • भगवान शिव को फूल, चावल, और धूप-दीप चढ़ाएं।
  • शिव जी की आरती करें और भोग लगाएं। (आरती नीचे दी गई हैं)

दिनभर का पालन:

  1. दिनभर का पालन करें:
  • एक समय फलाहार करें।
  • पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और भगवान शिव का ध्यान करें।
  • शिव मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें।

संध्या पूजा:

  1. शाम की पूजा:
  • शाम को फिर से भगवान शिव की पूजा करें और आरती उतारें।
  • भगवान शिव की कथा सुनें या पढ़ें।

व्रत का समापन:

  1. अगले दिन का पालन:
  • अगले दिन ब्राह्मण को भोजन कराएं और वस्त्र, फल, दक्षिणा आदि दान करें।
  • भगवान शिव से व्रत के सफल समापन की प्रार्थना करें और प्रसाद ग्रहण करें।

इन सरल चरणों का पालन करके आप सावन सोमवार का व्रत आसानी से कर सकते हैं।

भगवान शिव के शक्ति मंत्र

भगवान शिव पूजा

महा मृत्युंजय मंत्र:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

ॐ नमः शिवाय मंत्र:

ॐ नमः शिवाय॥

रुद्र गायत्री मंत्र:

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

शिव तांडव स्तोत्र मंत्र:

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥

शिव पंचाक्षरी मंत्र:

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नमः शिवाय॥

भगवान शिवजी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥

एकानन चतुरानन
पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥

दो भुज चार चतुर्भुज
दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते
त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥

अक्षमाला वनमाला,
मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै,
भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर
बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक
भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥

कर के मध्य कमंडल
चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी
जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित
ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी
सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥

सावन सोमवार व्रत कथा

सावन सोमवार व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसका नाम देवदत्त था। वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था और हर सोमवार को व्रत करता था। हालांकि वह गरीब था, लेकिन उसकी श्रद्धा और भक्ति में कोई कमी नहीं थी। देवदत्त हर दिन भगवान शिव की पूजा करता, उनके नाम का जाप करता और उनके लिए व्रत रखता था।

एक दिन, देवदत्त की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे सपने में दर्शन देने का निश्चय किया। सपने में भगवान शिव ने देवदत्त से कहा, “हे भक्त, तुमने अपनी भक्ति से मुझे प्रसन्न कर दिया है। बताओ, तुम्हारी क्या इच्छा है?” देवदत्त भगवान शिव के दर्शन पाकर अत्यंत प्रसन्न हुआ और हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगा।

उसने कहा, “हे महादेव, मेरी एकमात्र इच्छा है कि मैं सदैव आपकी भक्ति करता रहूँ और आप मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें।” भगवान शिव उसकी प्रार्थना सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और कहा, “हे ब्राह्मण, तुम हमेशा मेरी भक्ति में लगे रहो, मैं तुम्हारी सभी मनोकामनाएं पूरी करूंगा।”

भगवान शिव ने देवदत्त को आशीर्वाद दिया और कहा कि जो भी व्यक्ति सावन सोमवार का व्रत सच्चे मन से करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और उसे कभी किसी चीज की कमी नहीं होगी।

इस आशीर्वाद के बाद देवदत्त का जीवन बदल गया। उसकी सभी समस्याएं दूर हो गईं और उसका जीवन सुखमय हो गया। उसकी गरीबी समाप्त हो गई और उसे भगवान शिव की कृपा से सभी प्रकार के सुख-साधन प्राप्त हुए।

तब से, सावन सोमवार का व्रत करने की परंपरा चली आ रही है और इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत के माध्यम से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

इस कथा से यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

भगवान शिव के सबसे शक्ति मंदिर के दर्शन देखेंअभी देखो

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